तीसरी जात
भारत में आप जातिवादी (या कहें, भेद्भावी) न होकर भी जाति के होने से इंकार नहीं कर सकते| जाति व्यवस्था को कर्म आधारित व्यवस्था से जन्म आधारित में परिवर्तित हुआ माना जाता है, और आज यह भेदभाव के आधार के...
View Articleमैला आँचल
प्रकाशन के साठ वर्ष बाद पहली बार किसी क्षेत्रीय उपन्यास को पढ़कर आज की वास्तविकता से पूरी तरह जोड़ पाना पता नहीं मेरा सौभाग्य है या दुर्भाग्य| कुछेक मामूली अंतर हैं, “जमींदारी प्रथा” नहीं है मगर जमींदार...
View Articleबहू बेटी, दामाद बेटा
भारत में स्तिथि कुछ इस तरह से मानी जाती है कि अगर आप किसी घर की बहू हैं तो आप इज्ज़त के पायदान में सबसे नीचे हैं और अगर आप किसी घर के दामाद हैं तो आप इज्ज़त में हर पायदान से ऊपर हैं| मगर नई हवा शायद कुछ...
View Articleप्रेम निवेदन
यह बसंत – वैलेंटाइन का प्रेमयुग नहीं है जिसमे इश्क़ इबादत था| ये वो वक़्त है जिसमें लवजिहाद और प्रेमयुद्ध है| सरफिरो के लिए प्रेम पूजा नहीं असामाजिकता है, यौन है, वासना है, बलात्कार है| एक हिन्दू – एक...
View Articleकुलनाम
अभी हाल में “ओऍमजी – ओह माय गॉड” फिल्म देखते हुए अचानक एक संवाद पर ध्यान रुक गया| ईश्वर का किरदार अपना नाम बताता है “कृष्णा वासुदेव यादव”| इस संवाद में तो तथ्यात्मक गलतियाँ है; १. उत्तर भारत में...
View Articleदो ऑटोरिक्शा चालक
अभी गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अपना पर्चा प्रस्तुत करने के लिए जाना हुआ| जाते समय अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से विश्वविद्यालय तक और लौटते समय दिल्ली कैंट से लोदी रोड तक ऑटो रिक्शा की सवारी का...
View Articleतिरंगा, पतंगे, और आजादी का जिन्न|
इस समय जब मैं यह आलेख लिख रहा हूँ, हम सभी स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं| कल शाम नई दिल्ली के खन्ना मार्किट में टहलते हुए और उसके बाद मुझे कई बार सोचना पड़ा कि हम अपना स्वतंत्रता दिवस किस तरह से मानते...
View Articleभारत की अबला नारी
भारत का समाज और क़ानून मात्र दो प्रकार की अबला नारियों की परिकल्पना करता है: १. नवविवाहिता स्त्री, विवाह के पहले ३-४ वर्ष से लेकर सात वर्ष तक (नवविवाहित अबला); और २. भारतीय परिधान पहनने और...
View Articleक्षमा – शीलता की धुर विरोधी: क्षमा-इच्छा
मेरे पिछले ब्लॉग के बाद कुछ मित्रों में मुझसे बातचीत करते हुए असहमति जताते हुए कहा है कि जब भी भावनाओं को आहात करने वाली कोई भी टिपण्णी सामने आती है तो प्रबुद्ध वर्ग क्षमा याचना की मांग तो करता है है|...
View Articleबलात्कार क्यों??
परिवार * स्त्री ने अपनी पांच साल की बेटी को कहा; “अपने कपड़े ठीक कर कर बैठा कर, लड़कों की निगाह खराब हो जाती है|” बेटी कुछ नहीं समझी, डर गयी| बेटा समझा अगर मेरी निगाह खराब होने में लड़की का दोष...
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